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Cricket Samrat se Bhent

  • Writer: Hansa
    Hansa
  • Aug 18
  • 4 min read

यह मेरी सबसे शुरुआती प्रकाशित रचनाओं में से एक है। सुनील गावस्कर के साथ यह काल्पनिक इंटरव्यू मेरे स्कूल की मैगज़ीन में छपा था। क्रिकेट की दीवानी, उस छोटी-सी उम्र में, मैंने उनके अलग-अलग इंटरव्यू में पढ़े उनके जवाबों को एक साथ पिरोया और कल्पना की कि अपने क्रिकेट हीरो के साथ बैठकर बातें करना कैसा होगा। अब, चार दशक बाद, मैं इसे ज्यों का त्यों साझा कर रही हूँ। आगे आप जो पढ़ेंगे, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा उस समय छपा था। पीछे मुड़कर देखने पर मुझे यह भी एहसास हो रहा है कि शायद यह हिंदी में प्रकाशित मेरा पहला - और आखिरी - लेख था।


सन 1971 में क्रिकेट की दुनिया में एक नवीन सितारा उभरा था। उसी सितारे ने आज अपनी जगमगाती रोशनी से समस्त संसार को चकाचौंध कर दिया है। क्रिकेट के इतिहास में उसका नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। एक-एक करके उसने सभी रिकार्ड तोड़ डाले हैं। वह और कोई नहीं, विश्व का सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर है, जिसकी ख्याति संसार के कोने-कोने तक फैल चुकी है।


Sunil Gavaskar at the batting crease during a photoshoot. Photograph by Rajiv Nair, originally published in Dharmyug, 26 November 1978.

Photo: Rajiv Nair, Dharmyug, 26 November 1978.


आज इसी महान क्रिकेटर का मैं इंटरव्यू लेने जा रही थी। जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम का ड्रेसिंग रूम। दो दिन बाद वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध एक-दिवसीय मैच होने वाला था। भारतीय टीम के खिलाड़ी नेट-प्रैक्टिस करने के पश्चात, बैठे चाय पी रहे थे। हँसी-मज़ाक का माहौल था।


उस महान हस्ती को अपनी आँखों के समक्ष देख मैं पलभर के लिए सकपका गई। समझ में नहीं आया कि उनसे क्या पूछूँ। एक अटपटा-सा प्रश्न उनके सामने रख दिया –“जमशेदपुर के मैदान के बारे में आपकी क्या राय है?” अपने पास बैठे किरमानी की गंजी खोपड़ी पर हाथ फेरते हुए उन्होंने मुस्कराते हुए उत्तर दिया –“यह तो एकदम साफ और चिकना है, बिल्कुल किर्री के सर के समान।” इतना सुनते ही सब ठहाके लगाने लगे। गावस्कर को इतने अच्छे मूड में देख मेरा हौसला बढ़ गया और बातों का सिलसिला आरम्भ हो गया।


मैं : गावस्कर जी, क्या आपको क्रिकेट खेलने का बचपन से ही शौक था?


गावस्कर : बचपन से क्या, चलना सीखने की देर थी, कि मेरी अपने बैट से घनिष्ठ मित्रता हो गई। ढाई फुट का छोटा-सा मैं, अपना तीन फुट लम्बा बैट सँभाले बरामदे के एक कोने में डट जाता और दूसरे छोर से मेरी 'आई' बॉल फेंका करती।


मैं : तब तो आप अपने सभी सहपाठियों से काफ़ी अच्छा खेलते होंगे?


गावस्कर : हूँ...... बचपन में मैं अपने दोस्तों के साथ घर के पिछवाड़े में खेला करता था। घंटों बैट लिए मैं टिका रहता। सभी मुझे आउट करने का भरसक प्रयत्न करते, पर हमेशा असफल रहते। आखिर तंग आकर वे मुझे जबरदस्ती आउट दे देते। (हँसते हुए) तब भी उन बेचरों की ही शामत आती। क्योंकि सारे मुहल्ले में सिर्फ़ मेरे पास ही एक बल्ला था। अतः, जैसे ही वे मुझे आउट दे देते, मैं अपना बल्ला बगल में दबाए, गुस्से से दनदनाता हुआ घर चला जाता। और वे हाथ मलते हुए देखते रह जाते। वो दिन भी क्या दिन थे – वो मौज-मस्ती, वो उन्मुक्तता, वो चिन्तारहित दिन। बड़े ही चाव से हम छक्के-चौक्के मारते, पर वह कमबख्त बॉल घरों की खिड़कियों को तोड़ने से नहीं चूकती और हमें दुम दबाकर भागना पड़ता।


तभी कुछ लड़कियों का झुंड गेटकीपर की नज़रें बचाकर ऑटोग्राफ़ माँगने अन्दर आ धमका। उनके जाने के पश्चात, गावस्कर ने हँसते हुए कहा – इन किशोरियों को देख मुझे एक घटना स्मरण हो आई है। ताज होटल, दिल्ली की लॉबी में मैं इसी तरह अपने चहेतों से घिरा हुआ था। एक दुबली-पतली शर्मीली लड़की एक कोने में खड़ी थी। “ऑटोग्राफ़ चाहिए तो आगे बढ़ो। इस तरह खड़े रहने से थोड़े ही मिल जाएगा,” कहते हुए एक लड़की ने उसे धकेल दिया। कुछ देर तक मैं कलम चलता रहा; एकाएक मेरी दृष्टि उस लड़की पर पड़ी, जो अब भीड़ से निकलने का भरसक प्रयत्न कर रही थी। मन ही मन मुस्कराते हुए मैंने कहा कि अब तो मैं सिर्फ़ उसी को ऑटोग्राफ़ दूँगा, जो मेरे साथ मेरे कमरे में एक कप कॉफ़ी पियेगी। कमरे में निस्तब्धता छा गई।


तभी वह शर्मीली लड़की आगे बढ़ी और मेरा हाथ थामकर मेरे कमरे की ओर बढ़ी। सभी अवाक् रह गए। लड़कियाँ आपस में फुसफुसाने लगीं – ‘कितनी बेशर्म लड़की है!’ वे यह नहीं जानती थीं कि वह लड़की और कोई नहीं, मेरी पत्नी मार्शनील थी।


Sunil Gavaskar with his wife, Marshneil Gavaskar. Photograph by Jeetendra Arya, originally published in Dharmyug, 17 February 1980.

Photo: Jeetendra Arya, Dharmyug, 17 February 1980


मैं : यह तो बड़ी ही दिलचस्प घटना थी। क्या आपके बेटे को भी क्रिकेट खेलने का शौक है?


गावस्कर : बाप सेर, तो बेटा सवा सेर। जब तक उसका बल्ला उसके सिरहाने पर ना हो, तब तक उसे नींद नहीं आती है।


Sunil Gavaskar playing cricket with his young son, Rohan Gavaskar. Photograph by Michael Rodrigues, originally published in Dharmyug, 11 February 1979.

Photo: Michael Rodrigues, Dharmyug, 11 February 1979


मैं : मैंने सुना है कि वेस्टइंडीज़ के भूतपूर्व कप्तान कालीचरण और आपकी काफ़ी अच्छी दोस्ती थी। क्या यह सच है?


गावस्कर : आपने ठीक सुना है। कालीचरण मेरा जिगरी दोस्त है। हम दोनों अरसों से एक दूसरे के प्रशंसक रहे हैं और अब भी हैं। यह कालीचरण का दुर्भाग्य ही मानिए कि उसे हिन्दी का एक लफ़्ज़ भी नहीं आता था। बड़ी मुश्किल से हम खिलाड़ियों ने उसे हिन्दी का एक वाक्य सिखाया; साथ में यह भी समझा दिया कि राह चलते किसी नवयुवती को ही अपना यह रटा हुआ पाठ सुनाना। पाँच मिनट उपरान्त - कालीचरण हमारी ओर शेर की भाँति दहाड़ता हुआ आ रहा था, उसका चेहरा क्रोध से तमतमा रहा था। गाल पर पाँचों उँगलियों के निशान साफ़ नज़र आ रहे थे और हम सब हँसते-हँसते लोट-पोट हो रहे थे। वह वाक्य कुछ यूँ था – “मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।”


Sunil Gavaskar with West Indies cricketer Alvin Kallicharran. Photograph by Michael Rodrigues, originally published in Dharmyug, 11 February 1979.

Photo: Michael Rodrigues, Dharmyug, 11 February 1979


काफ़ी समय व्यतीत हो चुका था। अतः मैंने कहा – धन्यवाद गावस्कर जी। जाते-जाते मैं अपनी ओर से तथा धर्मयुग के पाठकों की ओर से आपको हमारी शुभकामनाएँ देना चाहती हूँ। आशा है कि परसों आपकी धुँआधार बैटिंग क्रिकेट जगत में धूम मचा देगी।


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8 Comments


ankitaawasthi60@gmail.com
2 days ago

Outstanding hansa . Love to read this. .waiting for another

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Hansa
2 days ago
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Thanks Ankitaa. Glad you liked it 😊

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Sainath
7 days ago

Nice interveiw


Unfortunately I don't watch cricket so the only name I recognised was Gawaskar 🤣


But it was fun

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Hansa
7 days ago
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Hahaha. At least you recognised Gavaskar 😅

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Vatsal
7 days ago

Its too late for me to start reading hindi now, been away from it since more than long. Some 7 years. It would be very hard and repelling to do ill take a pass at it. It must be great i am sure of it, could you do it in english?

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Hansa
7 days ago
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I'll keep it in mind Vatsal. And translate, when I have the time 😅

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Meena
7 days ago

Ha ha ha this was hilarious.. those were days really.

Remember I told u we had a program where gavaskar took the mic and said as opening batsman i can't afford to be late

Really amazing

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Hansa
7 days ago
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Am glad you liked it Meena. No, I don't remember 🤔

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